मंगलवार, 25 अगस्त 2015

भाजपा नेतृत्व के निशाने पर आए शत्रुघ्न 

बिहार चुनाव के बाद होगी अनुशासनात्मक कार्रवाई

नवकांत ठाकुर

संगठन व सरकार में सम्मानजनक स्थान नहीं मिलने की टीस का मुजाहिरा करते हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने इन दिनों अपने बागी तेवरों व विवादास्पद बयानों से भाजपा के लिये जिस कदर असहज स्थिति उत्पन्न की हुई है इसके नतीजे में वे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सीधे निशाने पर आ गये हैं। हालांकि पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर फिलहाल उनके मामले में संयम बरतना ही बेहतर समझा है लिहाजा उनके किसी भी बयान पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी जा रही है। लेकिन पार्टी नेत्त्व ने साफ कर दिया है कि उनकी मौजूदा हरकतों को कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है और चुनाव समाप्त होने के फौरन बाद इन तमाम मसलों को लेकर उनके खिलाफ ठोस व कड़ी कार्रवाई करने में कतई कोताही नहीं बरती जाएगी। 
वास्तव में देखा जाये तो केन्द्र में भाजपा की सरकार बनने के कुछ ही अर्से के बाद से शत्रुघ्न ने अपने बागी तेवरों का मुजाहिरा करना आरंभ कर दिया था। इसी सिलसिले में उन्होंने पार्टी के हर उस नेता की तरफदारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जिसने पार्टी लाईन के बाहर जाकर बयानबाजी की हो। मामला चाहे पार्टी के बुजुर्ग नेताओं को संगठन व सरकार से अलग करके मार्गदर्शक बना दिये जाने का हो या फिर दरभंगा के सांसद कीर्ति आजाद द्वारा ललित मोदी विवाद में सुषमा स्वराज का नाम सामने आने के लिये पार्टी की आस्तीन में छिपे सांपों की ओर इशारा किये जाने का। हर मामले में शत्रुघ्न ने सार्वजनिक तौर पर पार्टी नेतृत्व के फैसलों के खिलाफ ही अपना विचार व्यक्त किया। यहां तक कि बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सरीखे भाजपा के धुर विरोधियों का भी दिल खोलकर गुणगान करने में उन्होंने कभी कोताही नहीं बरती। एक ओर भाजपा ने बिहार में लगातार नितीश के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है जबकि शत्रुघ्न सार्वजनिक तौर पर नितीश की तारीफ में कसीदे काढ़ते नहीं थक रहे हैं। भाजपा के किसी जमीनी कार्यक्रम में शिरकत करना भले ही वे जरूरी ना समझते हों लेकिन नितीश के हर बुलावे पर दौड़ते हुए चले जाना उनकी आदत में शुमार हो गया है। यहां तक कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा नितीश को विश्वासघाती डीएनए वाला नेता बताये जाने का पुरजोर विरोध करने में भी शत्रुघ्न ने कोई कसर नहीं छोड़ी। बताया जाता है कि शत्रुघ्न के इस मित्रवत व्यवहार से अभिभूत होकर उनके पिता के नाम पर पटना के एक अस्पताल का नामकरण करने के बाद अब नितीश ने आगामी चुनाव में उनकी पत्नी को अपनी पार्टी से टिकट देने का भी फैसला कर लिया है। जाहिर तौर पर शत्रुघ्न की इन तमाम हरकतों व नितीश के साथ जारी उनकी सियासी जुगलबंदी से पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का नाराज होना स्वाभाविक ही है। लेकिन अब सीधे तौर पर पार्टी लाईन से बाहर जाते हुए उन्होंने जिस तरह से बिहार में चुनाव से पहले ही मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी का नाम घोषित किये जाने की मांग करते हुए लोजपा अध्यक्ष रामविलास पासवान को राजग की ओर से मुख्यमंत्री पद का दावेदार बनाये जाने का विचार व्यक्त कर दिया है उससे पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के सब्र की इंतहा हो गयी है। यही वजह है कि भाजपा के एक शीर्ष रणनीतिकार ने नाम नहीं छापे जाने की शर्त पर बेलाग लहजे में यह बताने में कोई कोताही नहीं बरती है कि पार्टी ने बिहार चुनाव से फारिग होने के फौरन बाद पहली फुर्सत में शत्रुघ्न को सबक सिखाने का पक्का मन बना लिया है। उन्होंने बताया कि इस समय शत्रुघ्न के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने का बिहार के चुनाव पर नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका के मद्देनजर फिलहाल उनके बयानों व हरकतों की अनदेखी करने का ही फैसला किया गया है और उनकी किसी भी बात का किसी भी स्तर से कोई भी जवाब नहीं देने की रणनीति अपनायी गयी है। लेकिन चुनाव सम्पन्न होने के बाद उन्हें अपनी हर हरकत का समुचित जवाब व हिसाब देना ही होगा।  

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