गुरुवार, 20 अगस्त 2015

अपनी ओर से बातचीत का दरवाजा बंद नहीं करेगा भारत 

पाकिस्तान के मसले पर किसी भी दबाव के सामने नहीं झुकेगी सरकार

नवकांत ठाकुर

पाकिस्तान के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की बातचीत से पहले भले ही पड़ोसी देश ने उकसावे की कूटनीति पर अमल करते हुए जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को नई दिल्ली स्थित अपने दूतावास में बातचीत के लिये आमंत्रित किया हो लेकिन इस मसले पर मच रहे चैतरफा हंगामे के बावजूद भारत सरकार ने इस मामले को अधिक तवज्जो देना मुनासिब नहीं समझा है। केन्द्र सरकार की ओर से साफ लहजे में यह संकेत दे दिया गया है कि ऊफा में हुई दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की बैठक में हुए समझौते के तहत दिल्ली में आयोजित हो रही राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की इस बैठक को निरस्त या स्थगित करने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता है। हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है कि पाकिस्तान की ओर से भारत के खिलाफ जो भी शरारती व खुराफाती हरकतें की जा रही है उसका सटीक व करार जवाब देने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। साथ ही सरकार की ओर से यह जताने में भी कोई कोताही नहीं बरती गयी है कि पाकिस्तान द्वारा अलगावावादियों के साथ गलबहियां किये जाने, सरहद पर संघर्ष विराम का उल्लंघन करके अशांति का माहौल बनाये जाने, सीमापार से आतंकियों की खेप भेजे जाने, सुरक्षा परिषद में कश्मीर के मसले को नये सिरे से उठाने का प्रयास किये जाने और पेशावर में हुए आतंकी हमले का दोष भारत के सिर मढ़ने की कोशिश किये जाने सरीखे मामलों को लेकर विपक्ष से लेकर सत्तापक्ष के भी कई शीर्ष नेताओं द्वारा फिलहाल बातचीत का दरवाजा बंद किये जाने का जो दबाव बनाने की कोशिश हो रही उसे अधिक तवज्जो देना कतई उचित नहीं होगा। 
वास्तव में देखा जाये तो पिछले दिनों गुरदासपुर में हुए आतंकी हमले में जिंदा पकड़े गये आतंकी नावेद के मामले ने पाकिस्तान को इस कदर बैकफुट पर ला दिया है कि फिलहाल वह भारत के साथ नजरें मिलाकर द्विपक्षीय बातचीत करने से बचने की कोशिशों में जुट गया है। इन्हीं कोशिशों के तहत उसने भारत को उकसाने की हरसंभव हरकतें शुरू कर दी हैं ताकि एक ओर उसे फिलहाल इस मामले की सफाई देने से बचने का अवसर मिल जाये और दूसरी ओर विश्व बिरादरी के सामने यह प्रचारित करने का भी मौका मिल जाये कि भारत ही बातचीत के माध्यम से विवादों का हल निकालने का इच्छुक नहीं है। लेकिन पाकिस्तान की इस नापाक नीयत को भारत भी अच्छी तरह समझ रहा है लिहाजा अपनी ओर से वार्ता पर विराम लगाने की पहल करने से परहेज बरतने की नीति अपनायी जा रही है। हालांकि पिछले साल भी इस्लामाबाद में होनेवाली विदेश सचिव स्तर की बातचीत से पूर्व पाकिस्तान ने ऐसी ही खुराफात को अंजाम देते हुए अपने दिल्ली दूतावास में जम्मू कश्मीर के अलगाववादी नेताओं को आमंत्रित कर लिया था जिस पर मचे बवाल के बाद भारत सरकार को वार्ता को स्थगित करने का फैसला करना पड़ा था। लेकिन इस बार उस कूटनीतिक गलती को दुहराने के लिये सरकार कतई तैयार नहीं है। यही वजह है कि विदेश मंत्रालय के उच्च पदस्थ सूत्रों से लेकर केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन ने भी बेलाग लहजे में यह जता दिया है राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार स्तर की वार्ता पर विराम लगाना कतई उचित नहीं होगा। हालांकि पाकिस्तान की ताजा हरकतों का उल्लेख करते हुए विपक्षी दलों से लेकर पूर्व भाजपाई विदेशमंत्री यशवंत सिन्हा ने ही नहीं बल्कि शिवसेना सरीखे सरकार के घटक दलों व विहिप सरीखे भाजपा के सहोदर संगठनों ने भी आगामी 23-24 तारीख को नई दिल्ली में होनेवाली इस बातचीत को स्थगित किये जाने का भारी दबाव बनाया हुआ है। लेकिन सरकार का मानना है कि पिछले दिनों आतंकी नावेद को जिंदा पकड़ने में हासिल हुई कामयाबी के बाद इस समय कूटनीतिक स्तर पर भारत का पलड़ा काफी भारी हो गया है जिससे पाकिस्तान को शर्मसार करने व उसे सीधे रास्ते पर आने के लिये बाध्य करने का भारत को सुनहरा मौका मिल गया है। लिहाजा ऐसे समय में अपनी ओर से बातचीत का दरवाजा बंद करने के विकल्प पर विचार करना भी कतई सही नहीं होगा।  




कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें