बुधवार, 2 सितंबर 2015

‘डीएनए’ की तकरार को धार देने में जुटी भाजपा

नितीश को सूबे के स्वाभिमान का प्रतीक नहीं बनने देगी भाजपा

नवकांत ठाकुर

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पिछले दिनों एक चुनावी रैली में बिहार के मुख्यमंत्री नितीश कुमार के ‘डीएनए’ पर सवाल उठाकर जिस सियासी तार को छेड़ दिया था उसी का नतीजा है कि गैरभाजपाइ खेमे ने इस मसले को बिहारी अस्मिता व स्वाभिमान से जोड़कर इसे बड़े चुनावी मुद्दे की शक्ल देने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। जाहिर है कि इस भावनात्मक मसले को तूफान बनता हुआ देखकर भाजपानीत एनडीए की परेशानी बढ़ना स्वाभाविक ही था लिहाजा अब तक समूचे भगवा खेमे ने इस मामले में अपनी ओर से चुप्पी साधे रखना ही बेहतर समझा था। लेकिन आज मोदी की भागलपुर में हुई रैली के साथ ही पहले चरण का चुनाव प्रचार अभियान समाप्त हो जाने के बाद इस पूरे अभियान की समीक्षा के लिये आयोजित हुई भाजपा के राष्ट्रीय पदाधिकारियों की बैठक में तय किया गया है कि अगर विरोधियों ने डीएनए के मसले पर बहस की चुनौती पेश कर दी है तो इस पर पीछे हटने की कोशिश हर्गिज ना की जाये। यही वजह है कि अब भाजपा ने भी नये सिरे से डीएनए के विवाद को पुरजोर तरीके से तूल देने की शुरूआत कर दी है और पार्टी की कोशिश है कि इस मामले को आधार बनाकर खुद को सूबे के स्वाभिमान के प्रतीक के तौर पर स्थापित करने की नितीश की कोशिशों को हर्गिज कामयाब नहीं होने दिया जाये। साथ ही आज की बैठक में यह भी तय हुआ है कि पार्टी के सीधे निशाने पर नितीश को ही रखा जाये और उनके सियासी चरित्र को कठघरे में खड़ा करते हुए मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की जाये कि नितीश वाकई धोखेबाजी के प्रतीक हैं और उनके इस राजनीतिक पहलू पर प्रहार करते हुए ही प्रधानमंत्री ने उनके डीएनए की शुचिता पर संदेह प्रकट किया था। 
राजधानी स्थित भाजपा मुख्यालय में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह के अलावा केन्द्रीय मंत्रियों जेपी नड्डा व पियुष गोयल की मौजूदगी में पूरे दिन चली पार्टी के तमाम राष्ट्रीय पदाधिकारियों व प्रवक्ताओं की बैठक में मुख्य रूप से बिहार चुनाव के मसले पर ही चिंतन किया गया और पहले चरण के प्रचार अभियान की समीक्षा करने के साथ ही अगले हफ्ते से आरंभ होनेवाले दूसरे चरण के प्रचार अभियान की रूपरेखा को अंतिम रूप भी दिया गया। प्राप्त जानकारी के मुताबिक अब तक के प्रचार अभियान में जिस तरह से नितीश द्वारा राजद व कांग्रेस के साथ गठजोड़ करने की पहल की गयी उस पर ही निशाना साधने की रणनीति में तब्दीली लाते हुए अब नितीश पर ही सीधा हमला करने का फैसला किया गया है। दरअसल लालू को जंगलराज का प्रतीक व कांग्रेस को भ्रष्टाचार की गंगोत्री के तौर पर प्रचारित करते हुए भाजपा अब तक मतदाताओं को यही बता रही थी इन दोनों के साथ रहकर नितीश बिहार में हर्गिज सुशासन स्थापित नहीं कर पाएंगे। जाहिर है कि इस तरह के प्रचार में सीधा निशाना लालू व कांग्रेस की ओर था जबकि नितीश के प्रति कोई ऐसी बड़ी बात सत्यापित नहीं हो पा रही थी जिससे जनता उन्हें सिरे से खारिज करने के लिये मजबूर हो जाये। इसी तकनीकी मसले पर विवेचना करने के बाद अब भाजपा ने सीधा नितीश को ही घेरने के लिये उसी डीएनए के मसले को हथियार बनाने का फैसला किया है जिसे भावनात्मक शक्ल देकर नितीश ने बिहार के स्वाभिमान के साथ जोड़ने की कोशिश की है। यही वजह है कि बैठक के बाद भाजपा के राष्ट्रीय सचिव श्रीकांत शर्मा ने नितीश पर सीधा हमला करते हुए उनके डीएनए में ही धोखेबाजी शामिल होने का आरोप लगाया है। श्रीकांत के मुताबिक नितीश का पूरा सियासी इतिहास ही धोखेबाजी से भरा हुआ है जिसके प्रति बिहार के लोगों को पूरी तरह जागरूक व सावधान करने में भाजपा कोई कसर नहीं छोड़ेगी। श्रीकांत के मुताबिक पहले चरण के चुनाव प्रचार में मिली कामयाबियों से भाजपा पूरी तरह संतुष्ट है और अब अगले चरण में सूबे की सभी नौ कमिश्नरियों में जोरदार प्रचार अभियान चलाया जाएगा जिसकी कार्ययोजना को काफी हद तक अंतिम रूप दे दिया गया है।    

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